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  • Writer's pictureMeenakshi Raje

कला संरक्षण मांगती है-एस. एम.आज़ाद(चित्रकार)

"पटना क़लम ", चित्रकारी की एक ऐसी शैली जिसमें बने चित्र इतिहास में आमजन की कहानी कह रहे हैं।इस शैली को बिहार की धरोहर कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी।अफ़सोस की बात तो यह है कि जिस चित्रकारी ने इतिहास के कई किस्सों को जीया वह आज महज़ किताबों में सिमट कर रह गई है।ऐसे में आरा के चौधराइन मुहल्ले के निवासी सुल्तान मुजफ्फर आज़ाद इस धरोहर को आज भी सम्भालने के कार्य में तन-मन-धन से प्रयत्नशील हैं।पेश है मीनाक्षी राजे की उनके साथ हुई बातचीत के अंश।




1. चूँकि आप एक कलाकार हैं और कायदे से चित्रकार कहना उचित होगा।मैं यह जानना चाहूँगी कि चित्रकारी का शौक कैसे पनपा?क्या रहा आपका सफ़रनामा एक चित्रकार के स्वरूप में?

मुझे बचपन से ही चित्रकारी करने का शौक है। मुझे विद्यार्थी जीवन से ही पत्रिकाएँ पढ़ने का शौक था। उसमें  छपे चित्र को देखकर,मुझे भी चित्रकारी करने की जिज्ञासा हुई और मैं लघु चित्रकारी करने लगा।

2.आप बिहार की अप्रतिम चित्रकला शैली पटना क़लम को अपने कैनवास पर उतारते हैं।ऐसी क्या खास बात लगी आपको जिसने आपको इस शैली में चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया

मैंने चित्रकारी की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली है।1976 में इस पारम्परिक "पटना कलम"के मर्मस्पर्शी विख्यात चित्रकार,स्व० राधामोहन प्रसाद जी(प्राचार्य, कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट पटना) से पटना कलम शैली की बारीकियों को सीखा।मेरे मार्गदर्शक रहे इनके सानिध्य का ही प्रतिफल है कि पटना कलम लघु चित्रकारी से जुड़ी मेरी चित्रकारी समय-समय पर प्रशंसित व पुरष्कृत होती रही है।

"पटना कलम "की लघु चित्रकारी को बनाने में तन-मन-धन से जुड़ा हूँ।इस शैली के इतिहास में संजोए इसके रक्षण और संवर्धन में प्रयासरत हूँ।ऐसी उम्मीद में हूँ कि आज नहीं तो कल सरकार मेरी फरियाद सुनेगी और साधन मुहैया करा कर इस शैली को पुष्पित पल्लवित करने में सहभागिता प्रदान करेगी।

पटना कलम शैली बिहार की एक बेशकीमती धरोहर है।मधुबनी पेंटिंग्स की तरह इसमें भी विदेशी धन खींचने की क्षमता है।
कलाकारिता के क्षेत्र में "पटना कलम" लघु चित्रकारी का विकास जनहित तथा राष्ट्रहित में एक कारगर कदम है।

3.पटना क़लम शैली के बारे में जब हम पढ़ते हैं तो बहुत कुछ अनूठा जानने को मिलता है।जैसे कि उसके लिए रंग तैयार करने की विधि और मौसम का खास ख़्याल रखा जाता है इसे बनाने में।तो क्या आप भी उसी तरीके से चित्र बनाते हैं या आपका क्या तरीका है?

प्राचीन समय में कलाकार रंग,कूची,कागज़ स्वयं बनाकर उसपर कलाकारी करते थे।बाद में जब कलर ब्रश हर कागज़ आदि उपलब्ध होने लगे तो कलाकारों ने उसी से अपने चित्रों में रंग भरने शुरू किया।मैं भी यही तरीका अपनाता हूँ।अपने ज़्यादातर चित्रों में मैं वॉटर कलर का प्रयोग करता हूँ।

4.इस शैली का स्थान अब सिर्फ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं तक सिलेबस के रूप में ही सिमट कर रह गया है।आप इस बात से कितना सहमत हैं?

इस शैली का स्थान सिलेबस तक सिमट कर रह गया है।मैं इस बात से सहमत हूँ।मेरा यह भी मानना है कि  गुरु शिष्य परंपरा को भी बढ़ावा देना चाहिए जो लोग औपचारिक शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर सके हैं।

5.सर ,आप इस चित्रकला शैली का क्या भविष्य देखते हैं?

पटना कलम शैली को बिहार सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जाए तो आज भी इस शैली के सुनहरे भविष्य की कल्पना की जा सकती है।

6.आपकी कोई राय या सरकार से माँग जिससे इस चित्रकला शैली को भी उतनी ही प्रसिद्धि मिले जितना कि आज 'मधुबनी चित्रकला'को मिल रहा है।

मेरा मानना है कि कला संरक्षण चाहती है।लोग मेरे चित्रों की सराहना करते हैं ,लेकिन आर्थिक सहायता देने के लिए कोई आज तक आगे नहीं आया।इसी अभाव के कारण मैं अपने चित्रों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने में असमर्थ हूँ।मैं बिहार सरकार से आग्रह करता हूँ कि जिस प्रकार मधुबनी चित्रकला को प्रोत्साहन मिल रहा है उसी प्रकार पटना कलम शैली को भी आगे बढाने का प्रयास किया जाए।

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